जिंदगी और में
जिंदगी के पास कुछ इस तरह बैठे,
अपनो से दूर होके कुछ खुद से बात करने को रुके,
वादियों और पवन के जोंखे,
ख्वाहिशों को लिए मानो उड़ रहे हैं।
बहते सन्नाटे सा ये समा
बहती हुई सी कुछ ख्वाहिशे...
मिलो सा ये समंदर ना रुकता कभी किसी जगह,
कुछ पुराने पन्नो सा हैं लम्हा,....
जो कही गुम सा है...
ना इसमे में कही ना गम कही...
हैं बस जो वो कुछ अपना सा हैं,...
कुछ ख्वाबो सा लिख्खा उसमे जो आसियना हैं।
में निकला था,
अपनी तलाश में, या फिर सपनो की...
मैं बैठा तो था कुछ लम्हों के लिए ही,
पर ना जाने कब रात हो गई, रात से सुबह हो गई...
और मेने पाया में कुछ बदल सा गया।
में बस में था...!
कुछ लम्हो के लिए ही सही में बस में था!
पर ना जाने क्यू,
ना जाने क्यू चुप सा हैं...
ना तडप कुछ पाने की ना हैं कुछ खोने का डर...
हैं जो बस ,अब वो यही हैं,...
इस किनारे सा कुछ कही...
अटक जाए जो पानी इस रोक से परे...
कुछ जज्बतो और कुछ हालातो को भी...
दो रोक अब तुम कुछ इस तरह,...
हैं वो दर्द भी इतना जरुरी नही।
में रुका था।
अपने पास ज़िंदगी के पास ख्वाहिशों की उड़ान में,
सपनो के शहर में अपनी ही दुनिया में...
आया था में शहर को देखने,
जा रहा हूँ खुद से मिलके।
समझो कुछ यू की,
बहते बह जाने दो जो रुक सा कुछ गया हैं जो....
और जो रुक गया,
कुछ तुम सा कही उसे अब बह भी जाने दो कही।
ना यहा मे हूँ ना कुछ और हैं तो बस यहा,कुछ वक़्त!
वक़्त जो खुद ठहरा हैं कुछ पल...
कह रहा रुक जा ना भाग अब और कही...
बेठ कुछ देर मुज संग कर कुछ बाते अनकही,...
छोड दे कल की बाते तू अब....
आ बेठ रुक और उठ बेह चले कही...
हाँ चल बेह चले कही...!
वादा रहा फिर लौट के आऊँगा...
जो जी भर पाया हूं फिर से जगमगाऊंगा...
नई रोशनी में फिर से में पंख फैलाए निकल जाऊंगा...
बहती नदी के पानी सा जिंदगी की साथ हर पल बह जाऊंगा...
पहाड़ो की आवाज सुनने खुद को मिलने में खुद तुझे मिलने आऊँगा...
हाँ, हाँ ज़िन्दगी में लौटके फिर वापस आऊंगा।
-मेरी कलम
#Artistqoute

Comments
Post a Comment