नजर





नजर से नजर को नजर लग जाती हैं,

ये नजर भी नजर से कितनी नजर आती हैं?

नजर से लगी नजर कितना कुछ बतलाति हैं,

बिन बोले बाते कई मुज्से यूहीं कर जाती हैं।

नजर से उसकी नजर नजरअंदाज़ हैं वो नजर,

पर बातो में उसकी हैं नजर की हैं जो ख्वहिशे नजर में,

सपनो में नजर हि तो नजर से हसीं नजारे दिखलाती हैं।

गुमनाम सी कुछ लबो की भाषा...

नजरे हि तो नजर से समजा जाती हैं ।

नजर मेरी नजर पे हैं उसकी,

और उसकी नजर कही और नजर से,

नजारे खेलती सुनाती हैं।

नजर से दर्द और आंसू से बहे हसी जिसकी ...

नजर हि तो हैं उसका आसियाना ,

ना वो भी कभी दे पाती जगह नजर में ,

हैं जरुरत उसे भी नजर की किसी नजर में ।

पर नजर आज यूही नम सी हैं,

कुछ चुप सी हैं, 

नजर से आंसू नजर नही आते ...

हा माना,

हा माना ...फिर भी...

नजर आज नजर की हि,

गुमसुम सी कुछ पहेली सा बनी बेठी ये जो नजर हैं,

ढूंढती उस नजर को हर दम इस नजर से

जो हैं कही बेनजर।

खो गई हैं कही या कहीं पास हैं?

नजर की नजर से नजर जो चुराई हैं नजर ने,

कमबख्त बडा नजराना बतलाती हैं।

खबर हो के भी जो हैं उठी नजर जब

जुक जाती हैं नजर बेखबर होकर तब।

क्या हैं वो नजर की कला नजर से ही हस जाती हैं 

ये नजर के दफा कुछ युही बेवजह मुश्कुराती हैं।

बात सारी नजर से ही तो नजर आती हैं

पर बात वो नजर की हर नजर कहा समज पाती हैं।

समजे वो गर नजर की अदाकारा को

जो खेल रही उनकी नजरो में बेजीजक जिजक से

छू के सिर्फ पलको की नजर से,

बात कुछ अनकही सी नजर में 

वो पढ़ जाती हैं निगाहे नजर से,

हमे तलाश उसी नजर की हैं...

जो नजर उस नजर को समंदर सा प्यार कहलाती हैं।

ना बाते मेरी माने, ना सुनती मेरी आंखे वो नजर,

निगाहो से रूठ सी गई ये नजर हैं जो...

मानो नदिया सी मुहँ फुलाई बेठी कही किसी की नजर में 

सायद नजर को,

अपनी हि नजर से नजर को नजर लग गई।

नजर ना लग जाए इस जुकी हुई नजर को इस नजर की

तभी नजर ने उस नजर को नजर से नजर कर लिया।

ये भी कितनी नजर अंदाज ना करने वाली बात हो गई।

ये पढ़ती निगाहो से हैं जो,

नजर इस नजर की बात को उसकी नजर की याद जो हैं।

"नजर चुप हो के भी बाते नजर की निगाहों से कर जाती हैं।"


-मेरी कलम

#Artistqoute



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