अमृतवाणी
यहीं तो मेरे होने का जवाब हैं।
ये जो जुड़ रही मुजसे आस हैं
यहीं तो तेरा मुजपे विश्वास हैं।
ये जो उठा जहाँ में तुफान हैं
यहीं तो मेरा रचा संसार हैं।
ये जो गिरते आंसू तेरे दर्द के हैं
वही तो मेरा लिख्खा प्यार हैं।
ये जो दर्द सहा जा रहा हैं
वही तो मुजपे भी बीतता सिने मे भौकाल हैं।
ये जो बिछड़ता रहा अपनो के साथ हैं
यहीं तो तेरे अपनो से मिलवाने का द्वार हैं।
ये जो तू रूठता मुझसे हर बार हैं
यहीं तो तेरा मुझपे यकीन-ए-खास हैं।
ये जो रातो को सुनाता तेरे आलम मेरे साथ हैं
यहीं तो तेरे फ़रियाद मुझसे मेरे पास हैं।
ये जो शिकायतों की लिस्ट लिए आता मेरे घर हैं
वहीं तो तेरा मुझपे यकीन हैं।
ये जो तेरा खुद से बात करना अकेलापन हैं
वही ना समझ तू बात करता मुझसे हर बार हैं।
ये जो कह रहा ना समझ रहा कोई तुझे हैं
यहीं खबर तू मुझसे बेखबर हैं।
ये तेरा मानना हैं तू अकेला खास हैं
हुँ में तेरे साथ हर पल, बस ना खबर हैं इस खबर से हर कोई कहता क्यों ये जुठ हैं।
-मेरी कलम
#Artistqoute

Keep it up 👍
ReplyDeleteIt's awesome 😍
ReplyDeleteGreat 🤟🏻